Old Gurugram Metro प्रोजेक्ट में बड़ा बदलाव, पहले फेज में सिर्फ दो अंडरपास का होगा निर्माण
राज्य सरकार की एक उच्चस्तरीय बैठक में इस संशोधित योजना पर मुहर लगी है। अब पूरे कॉरिडोर में सबसे पहले बख्तावर चौक और बजघेड़ा चौक पर अंडरपास का निर्माण किया जाएगा।

Old Gurugram Metro परियोजना के तहत अंडरपास (ग्रेड सेपरेटर) के निर्माण की रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य निर्माण अवधि के दौरान स्थानीय यातायात को चरमराने से बचाना है। गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) ने फैसला किया है कि 28.5 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में पहले चरण में प्रस्तावित छह अंडरपास में से, फिलहाल केवल दो प्रमुख चौराहों पर ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
राज्य सरकार की एक उच्चस्तरीय बैठक में इस संशोधित योजना पर मुहर लगी है। अब पूरे कॉरिडोर में सबसे पहले बख्तावर चौक और बजघेड़ा चौक पर अंडरपास का निर्माण किया जाएगा। बाकी चार अंडरपास का काम मेट्रो के मुख्य कॉरिडोर का सिविल वर्क पूरा होने के बाद शुरू होगा।

GMRL के अधिकारियों के मुताबिक, यह बदलाव पुराने गुरुग्राम की संकीर्ण सड़कों और घनी आबादी को देखते हुए किया गया है।
मूल योजना में GMDA द्वारा अनुमोदित पांच अंडरपास (₹350 करोड़ की अनुमानित लागत पर) का निर्माण GMRL को मेट्रो के साथ ही करना था।
नई रणनीति के अनुसार, इन पांचों में से चार अंडरपास मेट्रो अलाइनमेंट (मार्ग) से कुछ दूरी पर हैं, जिनमें सेक्टर 3ए/4/5 रेलवे रोड चौक, सेक्टर-5 जंक्शन से शीतला माता रोड (वन वे), रेजांगला चौक और पुरानी दिल्ली रोड जंक्शन शामिल हैं।
यदि मेट्रो पिलर निर्माण और इन अंडरपास के लिए एक साथ बड़े पैमाने पर खुदाई की जाती है, तो सीवर और पानी की लाइनों को स्थानांतरित करने की जरूरत पड़ेगी। इससे यह पूरा इलाका भीषण ट्रैफिक जाम का सामना करेगा।
GMRL का तर्क है कि जहां अंडरपास और मेट्रो पिलर सीधे एक ही कॉरिडोर में (जैसे बख्तावर चौक पर) आ रहे हैं, वहीं पर काम करने से यातायात पर कम असर पड़ेगा।
इस बदलाव को लेकर GMDA और GMRL के अपने-अपने तर्क हैं:

GMDA चाहता था कि दोनों काम (मेट्रो और अंडरपास) एक साथ हों, ताकि लोगों को ‘एक ही बार’ असुविधा का सामना करना पड़े और बाद में दोबारा खुदाई न करनी पड़े।
GMRL का स्पष्ट मत है कि पुराने शहर की सड़कों की चौड़ाई कम होने और कई अंडरपास के एक किलोमीटर के भीतर होने के कारण एक साथ खुदाई करने से पूरा ट्रैफिक सिस्टम ठप हो जाएगा। इसलिए बेहतर है कि गैर-कॉरिडोर अंडरपास का निर्माण बाद में किया जाए।












